आज कल भारतीय समाज मे एक नया ट्रेंड चला है खासकर सोशल मीडिया पर . ज्यादातर लोगों को सच्चाई और तथ्यों से कोई मतलब नही होता है बस गन्दी राजनीति या असमाजिक तत्वों द्वारा चलाये अभियान में अपना योगदान देना शुरू कर देते हैं. ऐसा ही माहौल पिछले कुछ साल से देश के एक बरिष्ठ नेता के खिलाफ देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर लोग विना तर्क के एक शान्त स्वभाव और गंम्भीर पद्ति से जीवन जीने वाले नेता राजनाथ सिंह पर तंज कसते नज़र आते है. कुछ मूर्ख या पार्टी भक्त उनके नाम तक को विगाड़कर राजनाथ सिंह की जगह निंदानाथ तक कहते दिखे हैं. तो कुछ लोग जो कई तथ्यों को देखकर और राजनाथ सिंह के जीबन के आधार पर उन्हें लौहपुरुष भी कहते दिखे . पर आज हम तथ्यों के जरिये देखते हैं कि असल जीवन मे राजनाथ सिंह हैं कौन ? निंदानाथ या लौहपुरुष  .इस बात को मैंने भी समझने की कोशिश की राजनीति में सबसे बड़ी बात की आज लगभग हर छोटे बड़े नेता पर कई आरोप लगते रहते हैं चाहें वो भ्र्ष्टाचार का आरोप हो या कुछ और पर राजनाथ सिंह पर उनके इतने विशाल राजनैतिक जीवन मे एक भी दाग नही लगा है. छोटे से बिधायक पद से लेकर देश के गृहमंत्री के पद तक के सफर में आज तक कोई उँगली नही उठा सका इसी से समझदार को समझ जाना चाहिए कि राजनाथ सिंह का व्यक्तित्व क्या होगा .हां 2017 में एक आरोप जरुर उनपर लगा था और वो था परिवारवाद का. आरोप था की उन्होंने अपने बेटे पंकज सिंह को विधानसभा का दिलवाया . लेकिन उस आरोप को गहराई में देखा तो इसमे तो सिर्फ गन्दी राजनीति और विरोधियों की मूर्खता ही दिखी . हमने पाया कि जंहा मुलायम सिंह – लालू यादव हों- या और भी ऐसे कई नेताओं के बेटे विना संगठन या पार्टी में काम किये हुए ही पहला चुनाव जीतने के बाद सीधे मुख्यमंत्री या मंत्री तक बने बैठे हैं. वंही पंकज सिंह ने 16 साल BJP संग्ठन और पार्टी काम करके पहला विधानसभा टिकट पाया. और इसमे एक और दिलचस्प बात सामने आई जिससे राजनाथ सिंह का कद मेरी नज़र में और बढ़ गया . जब 2012 में भी पार्टी कार्यकर्ता और कुछ नेता पंकज सिंह को विधानसभा का टिकट देना चाहते थे तब तब राजनाथ सिंह ने साफ मना कर दिया कि अभी ये नही हो सकता इन्हें अभी और संगठन में काम करने दीजिये अगर भविष्य में पंकज सिंह में काबिलियत होगी तो पार्टी उन्हें टिकट देदे पर अभी ये सम्भव नही है. और इसी बजह से पंकज सिंह को 2012 में टिकट नही मिला था .1947 के बाद देश मे आज तक ऐसा कोई गृहमंत्री नही हुआ जिसने अपने कार्यकाल में देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर इतनी गम्भीरता से काम किया हो . पिछले 4 साल में देश मे नक्सलियों और आतंकियों की हर गतिविधियों पर नकेल सी कसी जा चुकी है. मंत्रालय की सक्रियता की बजह से खुफिया एजेंसी घटना होने से पहले ही सैकड़ो गतिविधियों का पर्दाफ़ाश कर चुकी है. लेकिन पिछले 4 साल में देश मे कोई अनहोनी नही घटित हो पायी. पूरी कोशिस करने के बाद भी आज तक आतंकी देश के अंदर अपनी मंशाओं को पूरा नही कर पाए..ये बात तो सभी को पता ही होगी राजनाथ सिंह हमेशा से ही भाजपा के लिए संकट मोचक रहे हैं. भाजपा सरकार के सामने आईं चुनौतियां राजनैतिक रही हों या प्रशासनिक संकटमोचक की भूमिका में आगे आकर राजनाथ ने ही बाधाओं को दूर किया है। मोदी सरकार के अन्य मंत्रियों के इत्तर प्रचार—प्रसार से दूरी बरतते हुए लो प्रोफाईल रहकर प्रशासनिक रूप से भी कार्य किया.जम्मू—कश्मीर एवं नक्सलवाद की समस्या से राजनाथ लोहा ले रहे हैं। पिछले 4 साल से देश के अंदर हर आतंकवादी गतिविधि निष्क्रिय कर दी गयी .. कोई घटना होन से पहले ही आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया . इन्ही सब बातों से पिछले 4 साल के उनके गृहमंत्री के कार्यकाल को देखकर अब वो सिर्फ भाजपा के ही नही देश के भी संकट मोचक बन गए हैं.प्राप्त आंकडो के अनुसार उडान के जरिए सैन्य एवं पुलिस बल से जुडे 27873 युवकों ने प्रशिक्षण स्वीकार किया है। 13175 को नौकरी का आॅफर मिल चूका है और 8807 युवक काम में लग गए हैं। यही नहीं राजनाथ ने जम्मू—कश्मीर में आतंकियों के मंसूबो को तोडने के लिए एसपीओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। पहले से 25474 एसपीओ की संख्या में इजाफा करते हुए गृह मंत्री ने 10हजार नए एसपीओ नियुक्त करने का निर्णय लिया है। एसपीओ को मिलने वाली 3000 की राशि को राजनाथ ने 6000 कर दिया है। ये एसपीओ पुलिस की मदद करते हैं अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ।आईएसआईएस के खिलाफ सजग है राजनाथ का गृह मंत्रालय
विश्व के लिए खतरा बने आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ राजनाथ का गृह मंत्रालय शुरू से ही सजग है। मंत्रालय की सजगता का प्रमाण है कि आईएसआईएस से सहानुभूति रखने वाले 81 लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक दबोचा गया है। इस मामले में राज्यों के साथ केंद्र का गृहमंत्रालय विशेष संपर्क स्थापित किए हुए है।नक्सलवाद पर नकेल
राजनाथ के गृह मंत्री बनने के बाद से नक्सली घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2013 में जहां नक्सली घटनाओं की संख्या 1136 थी। 2017 में घटकर वो 1048 रह गई हैं। हालांकि सूकमा सरीखे घटनाओं का घाव सरकार पर जरूर लगा है। मगर आंकडे बता रहे हैें कि नक्सलियों की गिरफतारी और सरेंडर करने की संख्या बढी है। नक्सलियों के गिरफ्तार करने की संख्या 1397 से बढकर 1840 पहुंच गई है। इस मामले में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज है। तो नक्सलियों के सरेंडर करने के मामले में 411 प्रतिशत की वृद्धि है। नकसलियों के सरेंडर करने की संख्या 282 से बढकर 1442 हो पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि यह सरकार के कडी कार्रवाई का नतीजा है।नक्सल क्षेत्र का आर्थिक विकास
नकसलियों पर लगाम कसने की कोशिशों के साथ गृहमंत्रालय ने आदिवासी एवं पिछडे इलाकों के विकास पर भी पूरा जोर दिया है। राहत प्रदान करने के लिए अति नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 35 से बढाकर 47 की गई हैं। यहां के लिए अलग से विकास योजनाएं चलाई जा रही हैं और यहां आर्थिक गतिविधियों को बढावा दिया जा रहा है। आंकडो के अनुसार नक्सल प्रभावित जिलों में विभिन्न बैंको के 358 नए ब्रांच खोले गए हैं। 752 एटीएम खोली गई हैं और 1784 डाक घर खोलने की अनुमति प्रदान की गई है।समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत के साथ साथ हलाहल विष भी निकला था। अमृत देवताओं के हिस्से आया। देवतागण अमृतपान करके अमर हो गये। किन्तु ब्रह्माण्ड की रक्षा के लिए विषपान भगवान शंकर ने किया था। इसी से भगवान शिवजी नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
आधुनिक काल में नीलकंठ की भूमिका जिस शख्स ने निभाई,उनका नाम है केन्द्रीय गृह मंत्री ठा० राजनाथ सिंह।
नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने में राजनाथ सिंह की सशक्त भूमिका रही। बीजेपी के चुनाव अभियान में राजनाथ सिंह कंधे से कंधा मिलाकर मोदी जी के साथ खड़े रहे। ये मोदी लहर और राजनाथ सिंह की संगठन क्षमता का ही कमाल था कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2014 में जबर्दस्त विजय प्राप्त की . राजनाथ ने हर बुराई अपने सर ले ली और सारा श्रेय मोदी जी को दे दिया।कम लोगों को ही पता होगा कि 10 जुलाई 1951 को जन्‍मे राजनाथ ने गोरखपुर विश्‍वविद्यालय से भौतिकी विषय में प्रोस्‍ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. उसके बाद 1971 में केबी डिग्री कॉलेज में वह प्रोफेसर नियुक्‍त किए गए.इमरजेंसी के दौरान कई महीनों तक जेल में बंद रहने वाले राजनाथ सिंह को 1975 में जन संघ ने मिर्जापुर जिले का अध्‍यक्ष बनाया.—-जीवन परिचय—-जन्म-10 जुलाई 1951 (आयु 64 वर्ष) , इनका जन्म रैकवार RAIKWAR क्षत्रिय वंश में हुआ है
जन्मस्थान—भभौरा, चंदौली जिला, उत्तर प्रदेश, उनके पिता का नाम राम बदन सिंह और माता का नाम गुजराती देवी था।
जीवन संगी-सावित्री सिंह
संतान–2 पुत्र 1 पुत्री
विद्याअर्जन-गोरखपुर विश्वविद्यालय
पेशा -भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता
शुरू से आरएसएस और जनसंघ से जुड़े रहे।आपातकाल का जमकर विरोध किया।इंदिरा गांधी की जनसभा में अकेले दम पर जमकर हंगामा किया और काले झंडे दिखाए।तब से संघ परिवार की नजरो में छाने लगे।—-राजनितिक जीवन की शुरुआत—-
आपातकाल के बाद हुए चुनाव में बेहद युवावस्था 26 वर्ष की आयु में पहली बार मिर्जापुर से विधायक बने।80 के दशक में भाजयुमो के राज्य अध्यक्ष और उसके बाद राष्ट्रिय अध्यक्ष भी रहे।कल्याण सिंह सरकार में 1991 में यूपी के प्रभावी शिक्षामंत्री रहे।इनके द्वारा लागु किये नकल और ट्यूशन विरोधी कानूनों ने शिक्षा माफियाओ को ध्वस्त कर दिया था और यूपीबोर्ड में नकल बन्द हो गयी थी। उन्होंने बोर्ड परीक्षा में नकल को गैर जमानती अपराध बना दिया। आज तक उन्हें इस कार्य के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने दोबारा इतिहास लिखवा कर इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव करवाया और वैदिक गणित को पहली बार पाठ्यक्रम में शामिल किया।उनके मंत्री के रूप में कामकाज, ईमानदारी और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें जल्द ही भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया। प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल में कार्यकर्ताओ में इतनी लोकप्रिय हुए कि उन्हें जल्द ही 1999 में वाजपेयी सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री बना दिया गया।—-मुख्यमंत्रिकाल—-
राजनाथ सिंह जी सन् 2000–2002 के बीच यूपी के मुख्यमन्त्री रहे।
प्रदेश में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2000 में केंद्र से वापिस बुलाकर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। इस कार्यकाल में उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को ठीक करने के लिये कड़े कदम उठाए। उन्होंने पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित वर्ग में विभाजन को लागू किया जिससे आरक्षण का लाभ वास्तविक अति पिछडो तक पहुँचे। लेकिन जातिवाद से ग्रस्त कोर्ट ने इसे भी बाद में खारिज कर दिया।उनका कार्यकाल आज भी उच्च कोटि के प्रशासन के लिए याद किया जाता है।  किन्तु जातिवादी ताकतों को एक ठाकुर का मुख्यमन्त्री बनना रास नही आया और इसी कारण मुख्यमन्त्री के रूप में जबरदस्त सफलता के बावजूद बीजेपी की हार हुई।अगर राजनाथ सिंह को यूपी के मुख्यमन्त्री पद पर कार्य करने हेतु एक कार्यकाल और मिल जाता तो आज यूपी की ये दुर्दशा नही होती।2003 में राजनाथ सिंह जी को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया। इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने अनेक योजनाए शुरू करी। किसान क्रेडिट कार्ड योजना इन्हीं की देन है। किसान कॉल सेंटर और खेती आय बीमा योजना भी इन्होंने ही शुरू करी थी। इसके अलावा किसानो को लोन देने में ब्याज दर में कमी और किसान आयोग प्रथम बार स्थापित करने का श्रेय भी राजनाथ सिंह जी को जाता है।2002 के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जानबूझकर राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश की राजनीति से दूर रखा गया और प्रदेश में अपने जनाधारविहीन चमचो को वरीयता दी। यहां तक की अटल आडवाणी की जोड़ी ने मायावती को भाजपा के हितो के ऊपर वरीयता दी। इन कारणों से भाजपा उत्तर प्रदेश में कमजोर होती गई। इस दौरान उन्हें विभिन्न राज्यो का प्रभारी महासचिव बनाकर भेजा गया और हर जगह उन्होंने उन विपरीत परिस्थितियों में भी कमल खिलाया। राजनाथ सिंह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपेक्षा के बावजूद पार्टी के अनुशासित सिपाही बनकर बिना कोई रोष जताए काम करते रहे। दुसरे चुनावो में भी उनकी सभाओ के लीये उम्मीदवारो द्वारा डिमांड और उनकी सभाओ में भीड़ ने उन बेवकूफ विश्लेषकों की बोलती बन्द कर दी जो उन्हें जनाधारविहीन नेता साबित करने की कोशिश करते थे।भाजपा जब केंद्र में घोर गुटबाजी और नेतृत्व के संकट से जूझ रही थी तो उनकी ईमानदारी, पार्टी और हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्धता और गुटबाजी से दूर रहने के कारणों की वजह से उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। लाल कृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे नेताओ की गुटबाजियो और अंडरखांने विरोध के बावजूद वो भाजपा में पहली बार लगातार दूसरी बार भी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए।दूसरी बार 23 जनवरी 2013 – 09 जुलाई 2014 तक।इस बार राजनाथ सिंह ने मोदी के साथ मिलकर अपनी कुशल रणनीति से बीजेपी को प्रचण्ड बहुमत दिलाया।जीत के असली हीरो वही थे पर मोदी जी ने जीत का श्रेय अमित शाह को दे कर उन्हें राष्ट्रिय अध्यक्ष बना दिया।
अरुण जेटली और बीजेपी के ठाकुर विरोधी नेताओं ने उन्हें कई बार बदनाम करने का प्रयास किया पर वो विफल रहे।क्योंकि सब जानते हैं कि राजनाथ सिंह का चरित्र शीशे की तरह साफ़ है।26 मई 2014 से देश के ग्रह मंत्री हैं।तब से पूर्वोत्तर के आतंकियों को म्यांमार में घुसकर मारने का निर्णय उन्ही का था।चीनी घुसपैठ और नक्सलवाद पर प्रभावी रोक लगाई।राजनाथ सिंह जी ने सीमा पर पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी का मुहतोड़ जवाब देने के लिए अर्धसैनिक बलों को खुली छूट दी है और कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को माकूल जवाब दिया है।
गौहत्या विधेयक के प्रबल समर्थक,पर अभी मोदी जी ने हरी झण्डी नही दी।
राजनाथ सिंह धर्मान्तरण पर पूर्ण रोक के पक्ष में हैं।लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने सर्वसम्मति से कुछ अप्रिय निर्णय लिए गये,जिनका पूरा अपयश राजनाथ सिंह ने अपने सर ले लिया।
वहीं हर प्रकार के अच्छे कार्य का श्रेय उन्होंने मोदी जी को दिया,जिससे जनता में मोदी जी का यशगान होता रहे।उनकी प्रतिभा और लौह पुरुश की छवि से प्रभावित मोदी जी ने स्वयम उनसे गृह मंत्री बनने का आग्रह किया,जिसे वो टाल नही पाए।कुछ राजपूत भाई भी अज्ञानतावश व कुछ निजी खुन्नस के कारण उनकी आलोचना करते हैं। जबकि कुछ अन्य समाज के लोग जो राजपूतों को उच्च पद पर देखना नही चाहते,वो भी राजनाथ सिंह की अनर्गल आलोचना करते हैं।जबकि राजनाथ सिंह बेहद ईमानदार,हिन्दुत्ववादी, जातिवाद से दूर,पक्षपात रहित लौह इरादों वाले नेता हैं।बीजेपी के इतिहास में उनसे सफल राष्ट्रिय अध्यक्ष कोई दूसरा नही हुआ है।
प्रधानमन्त्री मोदी जी इन्हें यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के लिए बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना चाहते थे .जिसे राजनाथ सिंह जी ने अस्वीकार कर दिया था .आज माननीय राजनाथ सिंह का कद सरदार पटेल से कम नही है. पिछले 4 साल में अपनी सूझ – बूझ से देश की आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षा एजेंसियों में जो सकारात्मक बदलाव आए हैं वो तारीफे काविल है ..ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको हमेशा ही एक शशक्त राजनेता के रूप में इतिहास में याद किये जाए। और सभी संकटों से दूर रहकर उन्नति के पथ पर अग्रसर हो…हमें गर्व है ऐसे लौहपुरुष गृहमंत्री पर जिन्होंने देश के 130 करोड़ देशवासियों के प्राणों की जिम्मेदारी अपने मजबूत कंधों पर ले रखी है.

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