9.85 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ कुल्‍हड़ दूध बेचने का शुरू किया काम, अब कई को दिया रोजगार

रोहतक [ओपी वशिष्ठ] सरकारी नौकरी पाने की चाह में ग्रुप-डी और सिपाही की भर्ती परीक्षा में लाखों युवाओं को जान का जोखिम उठाकर बसों व ट्रेनों पर लटककर पेपर देने जाते हुए सोशल मीडिया पर हर किसी ने देखा। इससे उलट रोहतक के सेक्टर 3 में रह रहे प्रदीप श्योरण ने मल्टीनेशनल कंपनी में 9.85 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी छोड़ स्वरोजगार शुरू किया। साथ ही उसने मामूली सी राशि खर्च कर एक दर्जन से अधिक परिवारों को घर बैठे रोजगार भी दे दिया है।

मूल रूप से चरखी दादरी के गांव मांडी पिरानू निवासी 33 वर्षीय प्रदीप श्योराण ने गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से एमबीए करने के बाद कई कंपनियों में जॉब की। कंपनी में बतौर मार्केटिंग मैनेजर के पद तक पहुंच गए। गांव में बेरोजगार युवाओं की फौज देखकर उसके मन में स्वरोजगार अपनाने का आइडिया आया। इसके बाद नौकरी छोड़कर गाय के दूध का पार्लर शुरू किया। इसके तहत वह दूध को उबालकर कुल्‍हड़ या चांदी के गिलास में पीने के लिए देते हैं। दूध कि डिमांड दिनों दिन बढ़ती जा रही है और वो नौकरी से भी ज्‍यादा कमा रहे हैं। वहीं लोगों की सेहत सुधर रही है।

एक दर्जन परिवार को दिया रोजगार

देसी गाय के दूध पार्लर के लिए उन्होंने गांव डोभ निवासी संदीप से संपर्क किया। संदीप देसी गाय पालते हैं। जब दूध की खपत बढ़ी तो उसने गांव के अन्य पशुपालकों से संपर्क साधा। उनको गाय पालने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ दूध खरीदने का भरोसा दिलाया। अब उनसे सीधे एक दर्जन से अधिक परिवार जुड़ गए हैं। धीरे-धीरे अन्य पशुपालकों को भी इससे जोडऩे की योजना है। इतना ही नहीं कुम्हारों को मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का आर्डर देना भी शुरू कर दिया है

दूध के साथ आर्गेनिक गुड़ और खांड भी दी जाती है

प्रदीप श्योराण ने बताया कि उसने रोहतक में शुरुआत में दो जगह मिल्क पार्लर की स्टॉल लगाई। धीरे-धीरे डिमांड बढ़ी तो सुबह-शाम शहर के प्रमुख पार्कों के बाहर स्टाल लगाते हैं। दिन में शिक्षण संस्थानों के बाहर। करीब 200 ग्राम गाय का दूध चांदी के गिलास या मिट्टी के कुल्डड़ में दिया जाता है। साथ में आर्गेनिक गुड़ व खांड दी जाती है। शुगर के मरीज के लिए भी यह दूध स्वास्थ्यवर्धक है। अब तो बैंक, कारपोरेट आफिस व अन्य संस्थानों से भी आर्डर मिलना शुरू हो गए हैं।

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