“जन्म – 31 जुलाई, 1541 ई.

राव गांगा के पौत्र व राव मालदेव के पुत्र

उपनाम – मारवाड़ का राणा प्रताप, प्रताप का अग्रगामी, भूला-बिसरा राजा

23 मार्च, 1560 ई.

  • इस दिन राव चन्द्रसेन का विवाह मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह की पुत्री बाईजीलाल सूरजदे से हुआ

इस तरह राव चन्द्रसेन महाराणा प्रताप के बहनोई हुए

1562 ई.

  • राव मालदेव का देहान्त
  • राव चन्द्रसेन राव मालदेव के तीसरे पुत्र थे, पर राव मालदेव की इच्छा से मारवाड़ की राजगद्दी राव चन्द्रसेन को मिली
  • सोजत दुर्ग में राव चन्द्रसेन का राज्याभिषेक हुआ
  • इसी वर्ष मजबूरी के चलते राव चन्द्रसेन को जालौर अकबर के सिपहसालार खान जहां को सौंपना पड़ा

1563 ई.

“लोहावट का युद्ध”

राव चन्द्रसेन ने किसी कारण से अपने एक नौकर पर क्रोधित होकर उसे मृत्युदण्ड देना चाहा, तो ये नौकर राव चन्द्रसेन के रिश्तेदार जैतमाल के पास पहुंचा

जैतमाल ने राव चन्द्रसेन से नौकर को माफ करने के लिए कहा, पर राव चन्द्रसेन ने जैतमाल की बात न सुनी, तब जैतमाल ने राव चन्द्रसेन के बड़े भाई उदयसिंह को भड़काकर मारवाड़ में विद्रोह करवाया

राव चन्द्रसेन ने उदयसिंह को सबक सिखाने के लिए गाँव लोहावट में मुकाम किया

उदयसिंह वहीं है जो बाद में “मोटा राजा” के नाम से प्रसिद्ध हुए

इस युद्ध में उदयसिंह के हाथ की बरछी राव चन्द्रसेन को लगी

राव चन्द्रसेन की तरफ से लड़ने वाले रावल मेघराज के हाथ की बरछी लगने से उदयसिंह घोड़े से गिर गए और सख्त जख्मी हुए। उदयसिंह का घोड़ा इस वार से मारा गया।

उदयसिंह की तरफ से जोगा सागाउत माडणोत काम आए

राव चन्द्रसेन विजयी रहे

  • राव चन्द्रसेन के बड़े भाई राव रामसिंह इन दिनों मेवाड़ से मारवाड़ आए और गूंदोच में रहने लगे

यहां से उन्होंने मारवाड़ के धणला वगैरह गाँव लूटकर उपद्रव करना शुरु किया

राव चन्द्रसेन ने नाडौल में राव रामसिंह को पराजित किया

  • अगले भाग में मेहरानगढ़ के युद्ध के बारे में लिखा जाएगा

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