1568 ई.

  • बूंदी के राव सूरजमल हाडा की पुत्री से विवाह करने के लिए राव चन्द्रसेन बूंदी पहुंचे

राव सूरजमल हाडा ने कन्यादान के बाद दहेज में 1 हाथी, 15 घोड़े व 1,05,000 का धन दिया

  • राव चन्द्रसेन मारवाड़ पहुंचे, जहां उनके भाई राव रायसिंह से लड़ाई हुई

राव चन्द्रसेन पराजित होकर भाद्राजूण चले गए

इस लड़ाई में राव चन्द्रसेन को काफी नुकसान उठाना पड़ा

15 नवम्बर, 1570 ई.

  • अकबर ने नागौर दरबार लगाया

इस दरबार में उपस्थित सभी शासकों ने बादशाही मातहती कुबूल की, पर राव चन्द्रसेन ने अकबर की अधीनता अस्वीकार कर जंगलों में प्रवेश किया

  • अकबर ने कला खां को फौज समेत भाद्राजूण भेजा

राव चन्द्रसेन भाद्राजूण से सिवाना चले गए

कला खां भी फौज लेकर सिवाना की तरफ निकला

गाँव मेहली में राव चन्द्रसेन व कला खां के बीच लड़ाई हुई, जिसमें राव चन्द्रसेन पराजित हुए

राव चन्द्रसेन ने जुर्माने के रुप में अपने ये 2 प्रतिष्ठित वीर कला खां को सौंपे :-

1) पंचोली सारण जैता का पुत्र
2) भंडारी डांवर का पुत्र

कुछ वर्ष बाद कला खां की किसी कारण से मृत्यु हुई, तो ये दोनों उसकी कैद से निकलकर राव चन्द्रसेन के पास पहुंच गए

मार्च, 1572 ई.

  • कुम्भलगढ़ दुर्ग में महाराणा प्रताप का विधिवत राज्याभिषेक हुआ, जिसमें राव चन्द्रसेन भी पधारे
  • इसी वर्ष राव चन्द्रसेन ने खीवा के पुत्र रतनसिंह को बुलावा भिजवाया, पर वह नहीं आया

दरअसल रतनसिंह ने आसरलाई गाँव में मुगलों से हाथ मिला लिया था

ये खबर सुनकर राव चन्द्रसेन ने आसरलाई गाँव को लूट लिया

इस लड़ाई में राव चन्द्रसेन की तरफ से नीवाज (जैतारण) ठिकाने के कल्याणदास ऊदावत वीरगति को प्राप्त हुए

1573 ई.

  • भिणाय नगर में मादलिया नाम का एक भील था, जो वहां की प्रजा पर अत्याचार करता था

राव चन्द्रसेन ने मादलिया भील को मारकर भिणाय पर अधिकार किया

  • अगले भाग में जारी

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